Advertisment

शेर की मूर्खता: चतुर चीकू खरगोश और कुएं का रहस्य

क्या शारीरिक ताकत ही सब कुछ है? जानिए कैसे नन्हे चीकू खरगोश ने खूंखार शेर के अहंकार का फायदा उठाया। 'शेर की मूर्खता' की एक नई और रोमांचक कहानी।

New Update
sher-ki-murkhta-aur-chiku-khargosh-hindi-story
Listen to this article
0.75x1x1.5x
00:00/ 00:00

भारत की विंध्याचल पर्वत श्रृंखला के पास 'कुसुमवन' नाम का एक बहुत ही घना और विशाल जंगल था। यह जंगल फलों, फूलों और नदियों से भरा हुआ था, लेकिन फिर भी वहाँ के जानवर कभी खुश नहीं रहते थे। इसका कारण था उस जंगल का क्रूर और अत्याचारी राजा - एक विशालकाय शेर (Lion) - विकिपीडिया। उस शेर का नाम 'भस्मासुर' था।

भस्मासुर बहुत ही गुस्सैल और खूंखार था। वह जब भी शिकार पर निकलता, तो अपनी भूख मिटाने के लिए सिर्फ एक जानवर को नहीं, बल्कि बेवजह कई जानवरों को मार डालता था। उसकी इस क्रूरता के कारण पूरे जंगल में दहशत का माहौल था। जानवरों को लगने लगा था कि अगर ऐसा ही चलता रहा, तो जल्द ही कुसुमवन में कोई भी जीवित नहीं बचेगा।

जानवरों की महा-पंचायत और एक कड़वा फैसला

sher-ki-murkhta-aur-chiku-khargosh-hindi-story-2

भस्मासुर के आतंक से बचने के लिए एक दिन जंगल के सभी जानवरों ने एक 'महा-पंचायत' बुलाई। इसमें 'गजराज' हाथी, 'बंटी' भालू और 'चंपा' लोमड़ी जैसे सभी समझदार जानवर शामिल हुए। गजराज ने अपनी सूंड उठाते हुए कहा, "साथियो! शेर का गुस्सा दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। हमें कोई ऐसा उपाय सोचना होगा जिससे हमारी नस्लें खत्म होने से बच जाएं।"

लंबी चर्चा के बाद, एक कड़वा लेकिन ज़रूरी फैसला लिया गया। सभी जानवर भस्मासुर के पास गए। चंपा लोमड़ी ने डरते-डरते शेर से कहा, "महाराज! आप जंगल के राजा हैं और हम आपकी प्रजा। आप रोज़ शिकार में इतनी मेहनत क्यों करते हैं? हमने फैसला किया है कि आज से रोज़ाना एक जानवर खुद आपके भोजन के लिए आपकी गुफा में आ जाया करेगा। बस हमारी विनती है कि आप बाकी जानवरों का अकारण शिकार न करें।"

Advertisment

आलसी भस्मासुर को यह सौदा बहुत पसंद आया। उसने अपनी गद्दी पर लेटते हुए गरज कर कहा, "ठीक है! लेकिन याद रहे, अगर किसी दिन मेरा भोजन समय पर नहीं पहुँचा, तो मैं पूरे जंगल में हाहाकार मचा दूँगा!"

चीकू खरगोश की बारी

इस समझौते के बाद कुछ दिन तो शांति से बीते। रोज़ एक बेचारा जानवर शेर का निवाला बन जाता। ऐसे ही दिन बीतते गए और एक दिन 'चीकू' नाम के एक नन्हे खरगोश की बारी आ गई। चीकू आकार में बहुत छोटा था, लेकिन उसका दिमाग किसी सुपरकंप्यूटर से कम नहीं था। वह बहुत ही बुद्धिमान और चतुर था।

जब चीकू शेर की गुफा की तरफ जा रहा था, तो उसके मन में कोई डर नहीं था। वह सोच रहा था, "आज मुझे इस अत्याचारी शेर का अंत करना ही होगा। ताकत से तो मैं इसे हरा नहीं सकता, लेकिन अपनी अकल से मैं इसे धूल चटा सकता हूँ।" यही सोचकर चीकू ने एक बहुत ही शानदार योजना बनाई। वह सीधा शेर की गुफा में जाने के बजाय, जानबूझकर जंगल में इधर-उधर टहलता रहा। वह तितलियों के साथ खेलता रहा और घास खाता रहा। उसने शेर के पास पहुँचने में कई घंटों की देरी कर दी।

शेर का गुस्सा और चीकू की मनगढ़ंत कहानी

दोपहर ढल चुकी थी। भस्मासुर शेर की गुफा में भूख के मारे पेट में चूहे कूद रहे थे। उसका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया था। वह अपनी गुफा के बाहर चक्कर लगा रहा था। तभी उसने देखा कि एक छोटा सा, पिद्दी भर का खरगोश धीरे-धीरे उसकी तरफ आ रहा है।

भस्मासुर ने ज़ोर से दहाड़ मारी, "अरे ओ मूर्ख जीव! एक तो तू इतना छोटा है कि तुझे खाने से मेरे दांत भी गीले नहीं होंगे, ऊपर से तू इतनी देर से आया है? आज मैं पूरे जंगल के जानवरों को चबा जाऊँगा!"

चीकू ने तुरंत घबराने का नाटक किया। उसने अपने दोनों कान नीचे गिरा लिए और कांपते हुए हाथ जोड़कर कहा, "महाराज! क्षमा करें! इसमें मेरी कोई गलती नहीं है। जंगल के जानवरों ने तो मेरे साथ पांच मोटे-ताज़े खरगोश और भेजे थे, ताकि आपका पेट भर सके। लेकिन... लेकिन..."

"लेकिन क्या? जल्दी बोल!" शेर ने अपनी लाल आँखें दिखाते हुए कहा।

चीकू ने मासूमियत से कहा, "महाराज, रास्ते में हमें एक बहुत ही विशाल और भयानक शेर मिल गया। उसने मेरे पांचों साथियों को खा लिया और मुझे यह संदेश देने के लिए छोड़ दिया कि आज से वह इस जंगल का नया राजा है। उसने कहा है कि वह आपको मारकर कुसुमवन पर राज करेगा!"

अहंकार पर चोट और 'शेर की मूर्खता'

'दूसरा शेर!' यह सुनकर भस्मासुर का खून खौल उठा। उसकी शेर की मूर्खता और अहंकार (Ego) अब जाग चुका था। उसे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ा कि वह भूखा है, उसे बस अपने प्रतिद्वंद्वी (Rival) को मारना था।

भस्मासुर ने ज़मीन पर पंजा मारते हुए कहा, "किसकी इतनी हिम्मत जो मेरे जंगल में मुझे ललकारे? चल, मुझे अभी उस पाखंडी के पास ले चल। मैं आज ही उसका नामो-निशान मिटा दूँगा।" चीकू मन ही मन मुस्कुराया। उसका पहला दांव सफल हो गया था। अब उसने कहा, "चलिए महाराज, मैं आपको उसके छिपने के अड्डे पर ले चलता हूँ।"

चीकू शेर को लेकर जंगल के उस हिस्से में गया, जहाँ एक बहुत ही पुराना और गहरा कुआं (Well) बना हुआ था। उस कुएं का पानी एकदम साफ और शीशे जैसा था।

कुएं का रहस्य और एक मूर्खतापूर्ण अंत

sher-ki-murkhta-aur-chiku-khargosh-hindi-story-1

कुएं के पास पहुँचकर चीकू ने अपनी उंगली से इशारा किया और फुसफुसाते हुए बोला, "महाराज! वह दुष्ट शेर डर के मारे इसी किले (कुएं) के अंदर छिपा बैठा है। आप खुद झांक कर देख लीजिए।"

भस्मासुर ने गुस्से में फनफनाते हुए कुएं की मुंडेर पर अपने पंजे रखे और अंदर झाँका। कुएं का पानी शांत था। जैसे ही शेर ने अंदर देखा, पानी में उसे अपनी ही परछाई (Reflection) दिखाई दी। लेकिन शेर की मूर्खता इतनी थी कि उसने अपनी परछाई को ही दूसरा शेर समझ लिया।

भस्मासुर ने उसे डराने के लिए अपना मुंह खोला और ज़ोर से दहाड़ मारी— "रोआआारर्र!" कुएं की गहराई से उसी दहाड़ की गूंज (Echo) वापस आई, जो और भी ज़्यादा तेज़ और डरावनी लग रही थी। भस्मासुर को लगा कि अंदर बैठा शेर भी उसे ललकार रहा है। उसका गुस्सा अब काबू से बाहर हो गया।

"तू मुझे डराएगा? मैं तुझे ज़िंदा नहीं छोड़ूंगा!" यह कहते हुए, भस्मासुर ने बिना कुछ सोचे-समझे उस गहरे कुएं में छलांग लगा दी। छपाक! कुआं बहुत गहरा था और उसकी दीवारें चिकनी थीं। भस्मासुर ने बाहर निकलने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह पानी में डूबता चला गया और अंततः उसने दम तोड़ दिया।

निष्कर्ष: जंगल में जश्न

चीकू खरगोश ने जब देखा कि अत्याचारी शेर मारा गया, तो वह खुशी से उछल पड़ा। वह तुरंत वापस गया और सभी जानवरों को यह खुशखबरी सुनाई।

पूरे कुसुमवन में जश्न का माहौल छा गया। गजराज हाथी ने चीकू को अपनी पीठ पर बिठा लिया और पूरा जंगल घूमने लगा। सभी जानवरों ने चीकू की चतुराई और साहस की खूब प्रशंसा की। उस दिन के बाद से जंगल में सभी जानवर बिना किसी डर के आज़ादी से रहने लगे।

बच्चों, हिंदी कहानियां हमें सिखाती हैं कि अगर हम मुश्किल समय में घबराने के बजाय अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करें, तो हम बड़े से बड़े संकट को भी टाल सकते हैं।

इस कहानी से सीख (Moral of the Story):

  1. बुद्धि बल से श्रेष्ठ है: शारीरिक ताकत से ज्यादा महत्वपूर्ण दिमागी ताकत होती है। एक छोटे से खरगोश ने विशाल शेर को हरा दिया।

  2. क्रोध अकल को खा जाता है: गुस्से में इंसान (या जानवर) सोचने-समझने की शक्ति खो देता है, जैसे शेर ने बिना सोचे कुएं में छलांग लगा दी।

  3. अहंकार पतन का कारण है: भस्मासुर का अहंकार ही उसकी मौत की वजह बना। 

और पढ़ें : -

 दूसरों पर मत हंसो: गज्जू हाथी और छोटू चूहे की अनोखी सीख

खुरापाती तेंदुआ: जब टिंकू की शरारत उस पर ही भारी पड़ी

बुद्धिमान तोता: मिंटू और चंदनवन का रक्षक

बेईमानी की सजा: झुमरू बंदर और रंगीला वन का सबक 

Advertisment